Rituals

पितृ दोष और नारायण नागबली: आपके पूर्वजों की शांति का मार्ग

2024-03-25 Pandit Nitin Acharya
Pitra Dosh and Narayan Nagbali: Paving the Path for Ancestral Peace

क्या आपके कार्यों में बार-बार बाधा आ रही है? जानिए पितृ दोष के लक्षण और नारायण नागबली पूजन क्यों आवश्यक है।

पितृ दोष तब माना जाता है जब हमारे पूर्वजों की आत्मा को शांति नहीं मिलती या कुंडली में सूर्य और राहु का संयोग होता है। इसके कारण संतान सुख में बाधा, आर्थिक संकट और वंश वृद्धि में रुकावट आती है। नारायण नागबली पूजन का महत्व: यह तीन दिवसीय विशेष अनुष्ठान है। नारायण बलि पूर्वजों की अतृप्त इच्छाओं की शांति के लिए की जाती है, जबकि नागबली उस दोष के लिए की जाती है जो नाग की मृत्यु अनजाने में होने से लगता है। उज्जैन में सिद्धवट का महत्व: उज्जैन का सिद्धवट (अक्षयवट) स्थान पूर्वजों के तर्पण के लिए विश्व विख्यात है। यहाँ शिप्रा नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण करने से सात पीढ़ियों के पितृ तृप्त होते हैं। विधि की विशेषता: पंडित नितिन आचार्य जी द्वारा प्राचीन पांडुलिपियों के आधार पर यह पूजन करवाया जाता है, जिसमें नारायण पूजा, सर्प बलि और विष्णु स्मरण मुख्य हैं।
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