Astrology

कालसर्प दोष निवारण: लक्षण, प्रकार और उज्जैन का महत्व

2024-03-22 Pandit Nitin Acharya
Kalsarp Dosh Nivaran: Symptoms, Types, and Ujjain's Role

कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए उज्जैन का महाकाल क्षेत्र सर्वोत्तम क्यों है? विस्तार से जानें।

जब कुंडली में सभी सात मुख्य ग्रह राहु और केतु के अक्ष (Axis) के बीच आ जाते हैं, तब कालसर्प दोष का निर्माण होता है। उज्जैन की भूमि "नागचंद्रेश्वर" की भूमि है, जहाँ स्वयं महादेव नागों के स्वामी के रूप में विराजमान हैं। प्रमुख प्रकार: अनंत, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखनाद, घातक, विषधर और शेषनाग। प्रत्येक प्रकार का प्रभाव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों पर पड़ता है। निवारण की विधि: - शिप्रा संगम स्नान: पवित्र नदी में स्नान कर शुद्धि प्राप्त करना। - नाग पूजन: चांदी के नाग-नागिन के जोड़ों का पूजन कर उन्हें विसर्जित करना। - राहु-केतु मंत्र जाप: ऊर्जा को संतुलित करने के लिए विशेष अनुष्ठान। उज्जैन का महत्व: उज्जैन की भौगोलिक स्थिति और यहाँ के ज्योतिर्लिंग की ऊर्जा कालसर्प दोष को शांत करने के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती है। विशेष रूप से श्रावण मास और नागपंचमी पर यहाँ पूजन करना अत्यंत लाभकारी होता है।
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