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उज्जैन में मंगल दोष निवारण का महत्व: एक विस्तृत विवरण
2024-03-20 Pandit Nitin Acharya

जानिए उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में मंगल दोष की शांति करवाना क्यों फलदायी माना जाता है और इसके पीछे के आध्यात्मिक रहस्य क्या हैं।
उज्जैन को मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है। यहाँ स्थित मंगलनाथ मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ मंगल दोष की शांति के लिए विशेष भात पूजा की जाती है।
मंगल दोष के लक्षण और प्रभाव:
मंगल दोष (मांगलिक दोष) तब होता है जब मंगल ग्रह कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो। इसके प्रभाव से वैवाहिक जीवन में देरी, आपसी कलह और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
उज्जैन ही क्यों?
स्कंद पुराण के अनुसार, मंगलदेव का जन्म उज्जयिनी की शिप्रा नदी की ऊर्जा से हुआ था। इसलिए यहाँ की मिट्टी और वातावरण में मंगल की ऊर्जा को शांत करने की अद्वितीय शक्ति है।
निवारण विधि:
1. भात पूजा: मंगलदेव को ठंडी प्रकृति का माना जाता है, इसलिए दही और पके हुए चावल (भात) से उनका अभिषेक किया जाता है।
2. संकल्प एवं मंत्र जाप: विशेष वैदिक मंत्रों के साथ जातक की सुख-समृद्धि का संकल्प लिया जाता है।
3. रुद्राभिषेक: क्योंकि मंगल के अधिपति देवता शिव हैं, इसलिए रुद्राभिषेक भी अत्यंत फलदायी होता है।
हमारे केंद्र में पंडित नितिन आचार्य जी के सानिध्य में प्राचीन परंपराओं के अनुसार यह पूजन संपन्न किया जाता है।
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